खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से मिलेगी हर गांव को नई पहचानः रक्षा खडसे

खेल राज्य मंत्री को विश्वास, इससे हर गांव से निकलेंगे चैम्पियन खिलाड़ी

खेलपथ संवाद

रायपुर। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (केआईटीजी) के पहले संस्करण के आयोजन स्थलों का दौरा किया और इस पहल को आदिवासी सशक्तीकरण, जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए एक परिवर्तनकारी मंच बताया।

केआईटीजी के पहले संस्करण में 9 खेल विधाओं में लगभग 3,800 प्रतिभागियों ने भाग लिया है, जिनमें एथलीट, कोच और अधिकारी शामिल हैं। इनमें 7 पदक खेल और 2 प्रदर्शन खेल शामिल हैं, और 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं। इस आयोजन का शुभंकर 'मोरवीर' भारत के 700 से अधिक आदिवासी समुदायों के साहस, गौरव और शौर्य का प्रतीक है।

इस अवसर पर श्रीमती खडसे ने कहा कि खेल केवल एक प्रतिस्पर्धी गतिविधि नहीं है, बल्कि सशक्तीकरण, आत्मविश्वास निर्माण और राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली साधन है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारत की खेल विरासत को पुनर्जीवित करने, आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और एक ऐसे भारत का निर्माण करने का एक सामाजिक आंदोलन है, जहां हर गांव में एक चैम्पियन हो।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत 2036 के ओलम्पिक तक शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में शामिल होने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ शीर्ष 5 में प्रवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, और केआईटीजी जैसी पहल इस राष्ट्रीय उद्देश्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। श्रीमती खडसे ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक और सरगुजा ओलम्पिक जैसी पारम्परिक खेल पहलें आदिवासी क्षेत्रों में पहले से मौजूद मजबूत और जीवंत जमीनी स्तर की खेल संस्कृति को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि ये खेल मौजूदा प्रतिभाओं को पहचानने और पोषित करने का एक संस्थागत मार्ग प्रदान करते हैं।

महिलाओं की भागीदारी पर मंत्रालय के विशेष ध्यान को रेखांकित करते हुए, उन्होंने अस्मिता लीग की सफलता का उल्लेख किया, जिसके तहत 124 लीगों ने संवेदनशील और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों सहित लगभग 14,000 लड़कियों को फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में भाग लेने में सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल खेलों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की लड़कियों के लिए अवसरों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

श्रीमती खडसे ने आगे बताया कि खेलों के दौरान उभरती प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए सभी सात प्रतियोगिता स्थलों पर भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षकों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सीधे खेलो इंडिया प्रणाली में शामिल किया जाएगा, जिससे जमीनी स्तर से लेकर शिखर तक का सुगम मार्ग प्रशस्त होगा।

भारत की सभ्यतागत खेल विरासत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय ऐतिहासिक रूप से तीरंदाजी (तीरंदाजी) सहित पारम्परिक खेलों के अग्रणी और अभ्यासकर्ता रहे हैं, और ये खेल हजारों वर्षों तक फैली इस समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने और मनाने का एक प्रयास भी हैं। विभिन्न स्थानों पर उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए, श्रीमती खड़से ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स आदिवासी सशक्तीकरण, युवा विकास और राष्ट्रीय खेल उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरा है।

जगदलपुर दौरे में श्रीमती. खडसे के साथ जगदलपुर के महापौर संजय पांडेय सहित वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति मयंक श्रीवास्तव, आईपीएस, डीडीजी खेलो इंडिया, शलभ सिन्हा, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक आकाश छिकारा, आईएएस, जिला मजिस्ट्रेट, प्रतीक जैन, आईएएस, सीईओ, जिला पंचायत, ऋषिकेष तिवारी, एसडीएम, जगदलपुर  तनुजा सलाम, निदेशक (खेल), छत्तीसगढ़ ममता श्री ओझा, निदेशक खेलो इंडिया और डोमन सिंह, आईएएस, कमिश्नर, बस्तर शामिल थे। कार्यक्रम का समापन खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों के साथ बातचीत और प्रतियोगिता स्थलों पर चल रहे प्रतिभा पहचान प्रयासों की समीक्षा के साथ हुआ।

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