भावी चिकित्सकों को दी बौद्धिक सम्पदा अधिकार की जानकारी
केडी विश्वविद्यालय में आईपीआर पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित
मथुरा। केडी विश्वविद्यालय और ट्रायन लॉ पार्टनर्स के संयुक्त प्रयासों से सोमवार की शाम विश्वविद्यालय के आडिटोरियम में बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य केडी मेडिकल कॉलेज तथा केडी डेंटल कॉलेज के भावी चिकित्सकों को नवाचार और आविष्कार के संदर्भ में बौद्धिक सम्पदा (आईपी) के महत्व से रूबरू कराना था। कार्यशाला में ट्रायन लॉ पार्टनर्स के विशेषज्ञों भारत शर्मा और सिद्धांत एम. शर्मा ने प्रतिभागी परास्नातक छात्र-छात्राओं को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की खूबियों से अवगत कराया।
कार्यशाला का शुभारम्भ कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल, केडी मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, उप-प्राचार्य डॉ. गगनदीप कौर, केडी डेंटल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर तथा मुख्य वक्ता भारत शर्मा और सिद्धांत एम. शर्मा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथि वक्ताओं का स्वागत कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी तथा प्रति-कुलपति डॉ. गौरव सिंह ने किया।
अतिथि वक्ता भारत शर्मा ने प्रतिभागियों को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के महत्व और उनके संरक्षण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार ऐसे कानूनी अधिकार हैं, जो किसी व्यक्ति या संस्था को उनकी बौद्धिक रचनाओं जैसे कि आविष्कार, साहित्यिक और कलात्मक कार्य, डिजाइन, प्रतीक, नाम और छवियों पर विशेष सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके प्रमुख प्रकारों में पेटेंट, जो आविष्कारों की रक्षा करता है। कॉपीराइट साहित्य, संगीत, फिल्म और सॉफ्टवेयर जैसे कार्यों को संरक्षित करता है। ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगों या प्रतीक की सुरक्षा करता है।
सिद्धांत एम. शर्मा ने कहा कि बौद्धिक सम्पदा कानून का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार की बौद्धिक वस्तुओं के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। श्री शर्मा ने भावी चिकित्सकों को पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और नवाचार के कानूनी पहलुओं की जानकारी दी ताकि वे अपने रचनात्मक कार्यों को संरक्षित कर सकें। उन्होंने कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार न केवल व्यक्तिगत और व्यावसायिक हितों की रक्षा करता है बल्कि राष्ट्र की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को भी बढ़ावा देता है। कार्यशाला में एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ जिसमें छात्र-छात्राओं ने पेटेंट और अनुसंधान संरक्षण से संबंधित शंकाओं पर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।
कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने अतिथि वक्ताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए चिकित्सा शिक्षा और नैदानिक अभ्यास में नवाचार, अनुसंधान की सत्यनिष्ठा और बौद्धिक सम्पदा संरक्षण के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को नवाचारी सोच विकसित करने तथा अपने मौलिक विचारों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित किया। कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल ने अतिथि वक्ताओं का आभार मानते हुए कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) पर आयोजित यह कार्यशाला भावी चिकित्सकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। यह पहल राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप नवाचार, अनुसंधान उत्कृष्टता और बौद्धिक सम्पदा जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय में बौद्धिक सम्पदा शिक्षा को मुख्यधारा के चिकित्सा प्रशिक्षण में एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में पीजी छात्र-छात्राओं के साथ ही महिला एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष डॉ. बी.पी. पांडेय, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पांडेय आदि उपस्थित रहे।
चित्र कैप्शनः मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के बाद विश्वविद्यालय के पदाधिकारी तथा अतिथि वक्ता, दूसरे चित्र में कार्यशाला में उपस्थित भावी चिकित्सक।
