राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान की नापाक हरकत
सोनीपत की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने दी पांच साल की सजा
पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी मानते हुए दी कठोर सजा
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान को नाबालिग खिलाड़ी के यौन उत्पीड़न मामले में सोनीपत की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी मानते हुए 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने 15 मई को वेदवान को दोषी करार दिया था, जबकि बुधवार को सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया। कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत पांच साल और धारा 12 के तहत तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
यह मामला अप्रैल 2023 का है। एक नाबालिग तीरंदाज ने आरोप लगाया था कि सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) केंद्र में आयोजित युवा चैम्पियनशिप ट्रायल्स के दौरान कुलदीप वेदवान ने उसका यौन उत्पीड़न किया। शिकायत के मुताबिक, सात अप्रैल 2023 की सुबह करीब चार बजे वेदवान खिलाड़ी के होटल के कमरे में पहुंचे और उसके साथ अनुचित शारीरिक हरकतें कीं। खिलाड़ी ने विरोध किया और करीब 15-20 मिनट बाद किसी तरह वहां से निकलकर दूसरे कमरे में पहुंची, जहां अन्य महिला खिलाड़ी ठहरी हुई थीं।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि बाद के टूर्नामेंटों में वेदवान उस पर अपने कमरे में रुकने का दबाव बनाते थे और सहयोग करने पर उसे “बड़ी खिलाड़ी” बनाने का भरोसा देते थे। जब खिलाड़ी ने घटना की जानकारी अपने परिवार को दी, तब परिवार ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को शिकायत सौंपी। आंतरिक जांच के बाद परिवार को सोनीपत पुलिस में मामला दर्ज कराने की सलाह दी गई। इसके बाद अगस्त 2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 354A और पॉक्सो एक्ट की धाराओं 10 व 12 के तहत केस दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद कुलदीप वेदवान जेल भेजे गए थे, लेकिन 2024 पेरिस पैरालम्पिक से पहले उन्हें जमानत मिल गई थी। उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी अभिलाषा चौधरी को भारतीय पैरा तीरंदाजी टीम का कोच नियुक्त किया गया था। पूर्व राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज और पूर्व सेना कर्मी कुलदीप वेदवान ने भारतीय पैरा तीरंदाजी में खास पहचान बनाई थी। उन्हें 2018 एशियाई पैरा खेलों के लिए भारतीय पैरा तीरंदाजी टीम का कोच बनाया गया था और उन्होंने टोक्यो पैरालम्पिक तक यह जिम्मेदारी निभाई। उनके मार्गदर्शन में हरविंदर सिंह ने तीरंदाजी में भारत का पहला पैरालम्पिक पदक जीता था। इसी उपलब्धि के आधार पर वेदवान ने द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए भी आवेदन किया था।
शीतल देवी और पायल नाग को ट्रेनिंग देने के लिए भी चर्चित
कुलदीप वेदवान विशेष रूप से शीतल देवी को प्रशिक्षण देने के लिए जाने जाते हैं। बिना हाथों के जन्मीं शीतल के लिए उन्होंने पैरों, कंधे और ठुड्डी की मदद से तीर चलाने की अनोखी तकनीक विकसित की थी। उनकी कोचिंग में शीतल देवी ने 2023 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीता और 2025 में विश्व चैंपियन बनीं। वहीं, वेदवान ने सोशल मीडिया के जरिए चारों अंगों से दिव्यांग तीरंदाज पायल नाग को भी खोजा और अपनी अकादमी में प्रशिक्षण दिया। पिछले महीने बैंकॉक में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज के फाइनल में पायल ने दुनिया की नंबर-1 तीरंदाज शीतल देवी को हराया था। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पायल नाग ने कहा, 'हम बहुत परेशान हैं। उम्मीद है कि वह जल्द ही इससे बाहर आ जाएंगे।'
