जौनपुर के लाल रोहित यादव ने किया कमाल
87.05 मीटर भाला फेंक जीता स्वर्ण, एशियाड का टिकट कटाया
खेलपथ संवाद
भुवनेश्वर। छह साल की उम्र में पिता ने हाथ में भाला थमाया था, आज उसी मेहनत ने रोहित यादव को इतिहास रचने वालों की कतार में खड़ा कर दिया। जी हां, उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले रोहित यादव ने राष्ट्रीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 87.05 मीटर की शानदार थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतते हुए एक नया कीर्तिमान बना दिया। इस प्रदर्शन के साथ वह 87 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले भारत के केवल तीसरे जैवलिन थ्रोअर बन गए।
जौनपुर जिले के मीरगंज इलाके के अदारी डभिया गांव निवासी मैराथन धावक सभाजीत यादव के पुत्र व युवा जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंक खिलाड़ी) रोहित यादव के ऐतिहासिक प्रदर्शन से पूरे क्षेत्र और गांव में खुशी का माहौल है। पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए रोहित ने खेल जगत में जिले और देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है। भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के अंतिम दिन रोहित ने अपने आखिरी प्रयास में 87.05 मीटर की ऐतिहासिक दूरी तक भाला फेंककर न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि मौजूदा वैश्विक शीर्ष सूची में दुनिया के दूसरे सर्वश्रेष्ठ थ्रोअर बन गए हैं।
इस धमाकेदार प्रदर्शन के साथ जौनपुर के लाल रोहित यादव इस सीजन के सबसे अग्रणी भारतीय जैवलिन थ्रोअर बनकर उभरे हैं। उन्होंने इस मामले में देश के सबसे बड़े स्टार और दो बार के ओलम्पिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को भी पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान वैश्विक रैंकिंग में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिरागे (92.62 मीटर) पहले स्थान पर हैं, जबकि रोहित यादव (87.05 मीटर) दूसरे और नीरज चोपड़ा (85.69 मीटर) चौथे स्थान पर खिसक गए हैं।
रोहित ने इस महा-थ्रो के साथ ही नागोया, जापान में होने वाले 20वें एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। उन्होंने वर्ष 2022 में मनु डीपी द्वारा बनाए गए 84.35 मीटर के मीट रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया। प्रतियोगिता में रोहित की थ्रो सीरीज शानदार रही, जिसमें उन्होंने क्रमशः 77.71 मीटर, 77.63 मीटर, नो मार्क, 77.51 मीटर, 79.40 मीटर और अंत में 87.05 मीटर का जादुई आंकड़ा छुआ।
जीत के बाद रोहित यादव ने भावुक होते हुए कहा कि वह अभ्यास के दौरान लगातार 86 और 87 मीटर की दूरी पार कर रहा था, लेकिन प्रतियोगिताओं में यह थ्रो नहीं निकल पा रहा था, जिससे मैं काफी परेशान था। आज आखिरी प्रयास में मुझे सही लय मिली और मैं यह मुकाम हासिल कर सका। इस प्रदर्शन से आगामी राष्ट्रमंडल खेल (ग्लास्गो) और एशियाई खेलों (जापान) के लिए मेरा आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।
रोहित की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही मीरगंज के अदारी डभिया गांव पहुंची, ग्रामीणों में जश्न का माहौल हो गया। पिता सभाजीत यादव (जो स्वयं मैराथन धावक रहे हैं) के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और पटाखे फोड़कर रोहित की सफलता का जश्न मनाया। क्षेत्र के खेल प्रेमियों और संभ्रांत नागरिकों ने इसे जौनपुर के खेल इतिहास का स्वर्णिम दिन बताया है।
मुख्य परिणामः जैवलिन थ्रो: रोहित यादव (87.05 मीटर - स्वर्ण), यशवीर सिंह (83.72 मीटर- रजत), सचिन यादव (82.32 मीटर - कांस्य)। टीम चैंपियनशिप: रोहित के शानदार प्रदर्शन की बदौलत उत्तर प्रदेश ने 71 अंकों के साथ पुरुषों की टीम ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।
छह साल की उम्र में पिता ने हाथ में थमाया था भाला
छह साल की उम्र में पिता ने जो भाला थमाया था, आज उसी मेहनत ने रोहित यादव को इतिहास रचने वालों की कतार में खड़ा कर दिया। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले रोहित यादव ने राष्ट्रीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर की शानदार थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतते हुए एक नया कीर्तिमान बना दिया। इस प्रदर्शन के साथ वह 87 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले भारत के केवल तीसरे जेवलिन थ्रोअर बन गए।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 2023 में कोहनी की गंभीर चोट के चलते उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी और लंबे समय तक मैदान से दूर रहना पड़ा। लेकिन कठिन दौर के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दमदार वापसी करते हुए अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
खेतों में शुरू हुई प्रैक्टिस से लेकर राष्ट्रीय मंच पर इतिहास रचने तक का यह सफर बताता है कि सफलता सिर्फ़ प्रतिभा से नहीं, बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और कभी हार न मानने वाले जज़्बे से हासिल होती है। रोहित यादव की यह जीत भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी।
