भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, देश को दिलाया स्वर्ण पदक
ओलम्पिक रजत पदक विजेता ने लगाई कॉमनवेल्थ में गोल्डन हैट्रिक
खेलपथ संवाद
ग्लासगो। भारत की मीराबाई चानू ने रविवार को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर दमदार वापसी की। इस पदक के साथ उन्होंने शानदार अंदाज में कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग के गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी की। इससे पहले दिन में ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम में रजत पदक जीतकर भारत के वेटलिफ्टिंग अभियान की शुरुआत की।
टोक्यो 2020 ओलम्पिक की रजत पदक विजेता ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 190 किलोग्राम (85 किग्रा स्नैच + 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क) का वजन उठाकर गेम्स का नया रिकॉर्ड दर्ज किया। उन्होंने तीनों कैटेगरी (स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल भार) में कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड तोड़े।
यह मीराबाई का चौथा कॉमनवेल्थ गेम्स पदक था। इससे पहले उन्होंने ग्लासगो 2014 में 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। इसके बाद गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। एसईसी आर्माडिलो में खेलते हुए मीराबाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी टक्कर का कोई नहीं है और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता।
उन्होंने गोल्ड कोस्ट 2018 में 48 किग्रा कैटेगरी में गेम्स-रिकॉर्ड 196 किग्रा (86 किग्रा+110 किग्रा) के साथ खिताब जीता था। इसके बाद बर्मिंघम 2022 में 49 किग्रा कैटेगरी में उन्होंने एक और गेम्स-रिकॉर्ड 201 किग्रा (88 किग्रा+113 किग्रा) के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
मीराबाई की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। स्क्वाट में बैलेंस बिगड़ने के कारण वह अपना पहला 82 किलोग्राम स्नैच लिफ्ट पूरा नहीं कर पाईं। हालांकि, उन्होंने तुरंत वापसी करते हुए दूसरे प्रयास में उसी भार को सफलतापूर्वक उठाया। उन्होंने अपने आखिरी प्रयास में 85 किलोग्राम का शानदार लिफ्ट करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स का नया स्नैच रिकॉर्ड बनाया।
क्लीन एंड जर्क में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। मीराबाई 105 किग्रा के अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाईं, लेकिन दूसरी बार में उन्होंने कोई गलती नहीं की और लगभग अपना स्वर्ण पदक पक्का कर लिया। नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 किग्रा + 93 किग्रा) के साथ रजत पदक हासलि किया, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी 167 किग्रा (77 किग्रा + 90 किग्रा) के साथ कांस्य पदक जीता। मीराबाई ने बाकी सभी खिलाड़ियों से 22 किग्रा की बड़ी बढ़त के साथ जीत अपने नाम की।
इससे पहले दिन में ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम में रजत पदक जीतकर भारत के वेटलिफ्टिंग अभियान की शुरुआत की। मणिपुर के 28 वर्षीय वेटलिफ्टर ने कुल 264 किलोग्राम (121 किग्रा + 143 किग्रा) भार उठाया और 11 वेटलिफ्टर्स के बीच दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि, वह मलेशिया के मोहम्मद अनिक बिन कासदान को नहीं रोक पाए, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के 121 किलोग्राम स्नैच रिकॉर्ड की बराबरी की और क्लीन एंड जर्क में 152 किलोग्राम का भार उठाकर कुल 273 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। केन्या के जोशुआ अमूंगा म्बोया ने 260 किग्रा (115 किग्रा+145 किग्रा) के साथ कांस्य पदक जीता।
ऋषिकांत ने स्नैच में शानदार प्रदर्शन किया और अपने तीनों प्रयासों में 116 किग्रा, 119 किग्रा और 121 किग्रा का भार सफलतापूर्वक उठाया। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने अपने पहले प्रयास में 143 किग्रा का भार उठाया, लेकिन 148 किग्रा और 151 किग्रा उठाने में वह नाकाम रहे। यह रजत पदक भारतीय सेना के इस वेटलिफ्टर की लगातार सफलता को दर्शाता है। उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 271 किग्रा (120 किग्रा+151 किग्रा) और एक नेशनल रिकॉर्ड है।
इसकी बदौलत उन्होंने पिछले साल अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का खिताब जीता था और ग्लासगो 2026 के लिए क्वालीफाई किया था। इसके बाद मुथुपंडी राजा ने पुरुषों के 65 किग्रा में रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या में एक और मेडल जोड़ा। इस भारतीय वेटलिफ्टर ने कुल 286 किग्रा (126 किग्रा + 160 किग्रा) का भार उठाया। मलेशिया के अज़नील बिन बिदिन मुहम्मद ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 299 किग्रा (133 किग्रा + 166 किग्रा) का रिकॉर्ड दर्ज किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
उन्होंने स्नैच, क्लीन एंड जर्क और ओवरऑल टोटल में गेम्स रिकॉर्ड बनाए। पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 282 किग्रा (125 किग्रा + 157 किग्रा) के साथ कांस्य पदक जीता। राजा ने 125 किग्रा स्नैच के साथ शुरुआत की और अपने दूसरे प्रयास में इसे बेहतर करते हुए 126 किग्रा उठाया। वह अपने आखिरी प्रयास में 129 किग्रा उठाने में सफल नहीं हुए। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 158 किग्रा और 160 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया, लेकिन अपने आखिरी प्रयास में 170 किग्रा उठाने में असफल रहे।
