विश्व एथलेटिक्स रेस वॉकिंग में अयोध्या के जयप्रकाश की जय-जय

इस जांबाज को केन्द्र और राज्य सरकार से मिले आर्थिक प्रोत्साहन

113 साल पहले स्टॉकहोम स्विटजरलैंड में बना था स्पोर्ट्स फेडरेशन

खेलपथ संवाद

ग्वालियर। स्पोर्ट्स के क्षेत्र में हमारा प्रदर्शन आबादी के हिसाब से बेशक अच्छा न हो लेकिन देश को कई सदाबहार खिलाड़ी मिले हैं, जिनका खेल ही जीवन है। ऐसे सदाबहार खिलाड़ियों में श्रीराम नगरी अयोध्या के जयप्रकाश भी शामिल हैं। अयोध्या के लाल ने विश्व एथलेटिक्स रेस वॉकिंग में नए प्रतिमान स्थापित कर समूची दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया है। इस एथलीट को भी केन्द्र और राज्य सरकार से आर्थिक प्रोत्साहन मिलना चाहिए।    

आईएएएफ सौ साल से अधिक पुराना स्पोर्ट्स फेडरेशन है। 18 जुलाई 1912 को इसकी स्थापना स्टॉकहोम स्विटजरलैंड में हुई थी। 1961 रेस वॉकिंग खेल स्पर्धा का पहला आयोजन था। 1961 का आईएएएफ विश्व रेस वॉकिंग कप 15-16 अक्टूबर 1961 को स्विट्जरलैंड के टिसिनो शहर के लुगानो में आयोजित किया गया था। इस प्रतियोगिता को लुगानो ट्रॉफी के नाम से भी जाना जाता था।

2016/18 में विश्व एथलेटिक्स रेस वॉकिंग टीम चैम्पियनशिप के रूप में नया नाम मिला। 1961 के शुरुआत में यह पुरुष सीनियर वर्ग की प्रतियोगिता थी। 1979 में महिलाओं की स्पर्धाएं शुरू की गईं। 2004 में 16 से 20 वर्ष के एथलीटों के लिए जूनियर वर्ग जोड़ा गया। 2022 में 35 वर्ष आयु वर्ग से लेकर उसके ऊपर के खिलाड़ियों को भी मान्यता प्रदान करते हुए शामिल किया गया। यह विश्व चैम्पियनशिप हर दो साल में आयोजित की जाती है। जिसमें एकल एवं टीम इवेंट होते आए हैं।

2026 में फुल मैराथन रेस वॉक, हाफ मैराथन रेस वॉक के रूप में पहले की बड़ी खेल स्पर्धाओं को परिवर्तित किया गया है। भारत पहली बार 2012 की आईएएएफ विश्व रेस वॉकिंग कप जोकि 12-13 मई को रूस में आयोजित हुई थी, उसमें प्रतिभाग किया था। तब भारतीय टीम तीसरे स्थान पर आने से चूक गई थी।

दूसरे स्थान पर रही यूक्रेनी टीम के एक सदस्य के डोपिंग में पकड़े जाने के कारण अयोग्य घोषित होने के बाद 7 साल बाद भारत को कांस्य पदक प्राप्त हुआ। भारतीय टीम उस खेल आयोजन में चीन, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया के बाद चौथे स्थान पर थी। भारतीय टीम के 20 किलोमीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और टीम रैंकिंग में तब 68 अंक मिले थे और वह  चौथे स्थान पर था। यूक्रेन टीम के बाहर होने के बाद भारत को 7 वर्ष बाद टीम इवेंट के रूप में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।

2022 में एलीट वर्ग महिला टीम को उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर टीम रैंकिंग बनी और कांस्य पदक प्राप्त हुआ। 2022 में 35 वर्ष आयु में एक पुरुष एवं एक महिला वर्ग में भारत को दो स्वर्ण पदक प्राप्त हुए। स्वतंत्र भारत के इतिहास का यह वह पल था जब अयोध्या की धरती पर जन्मे जयप्रकाश को विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य मिला। जयप्रकाश को न केवल प्रतिभाग का अवसर मिला बल्कि उसने विश्व एथलेटिक्स द्वारा आयोजित विश्व चैम्पियनशिप में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर नया इतिहास रच दिया। भारत के अब तक एलीट वर्ग में तीन पदक और बढ़ती आयु वर्ग में दो स्वर्ण पदक हैं।

जयप्रकाश को एक बार फिर से अयोध्या की धरती से विश्व स्तर पर विश्व पताका लहराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उम्मीद है कि जयप्रकाश फिर से गोल्ड मेडल जीतकर दक्षिण कोरिया में तिरंगा लहराएगा। इस जांबाज की  उपलब्धियों पर खेल मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। बेहतर होगा जयप्रकाश को नगद पुरस्कार के साथ नौकरी भी मिले ताकि वह राष्ट्र का गौरव बढ़ा सके।

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