एआई के बदलते व्यावसायिक परिदृश्य से रूबरू हुए राजीव एकेडमी के विद्यार्थी
रिसोर्स पर्सन पारुल गौतम ने एमबीए के विद्यार्थियों से साझा किए अनुभव
मथुरा। आज के कॉर्पोरेट परिवेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) संगठनों को केवल संचालन दक्षता बढ़ाने तक सीमित नहीं रखती बल्कि दीर्घकालिक व्यावसायिक रणनीतियों को भी मजबूत बनाती है। एआई के माध्यम से कम्पनियां ग्राहक व्यवहार का विश्लेषण कर व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर रही हैं, जिससे ग्राहक संतुष्टि और ब्रांड निष्ठा दोनों में वृद्धि होती है। यह बातें रिसोर्स पर्सन पारुल गौतम, सीनियर एचआर, स्ट्राइव ने राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के एमबीए छात्र-छात्राओं को बताईं।
रिसोर्स पर्सन पारुल गौतम ने छात्र-छात्राओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बदलते व्यावसायिक परिदृश्य से रूबरू कराते हुए बताया कि प्रबंधक किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर सतत प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रबंधन में एआई केवल तकनीकी उपकरण नहीं बल्कि रणनीतिक नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि डेटा आधारित निर्णय लेने की क्षमता प्रबंधकों को तेजी से बदलते बाजार में आगे रहने में मदद करती है।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने एआई के प्रमुख उपयोग क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की। हाइपर-पर्सनलाइजेशन और ग्राहक अनुभव के संदर्भ में उन्होंने बताया कि एआई ग्राहक डेटा का विश्लेषण कर उनकी पसंद और आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाता है, जिससे कम्पनियां बड़े स्तर पर व्यक्तिगत सेवाएं प्रदान कर पाती हैं। संचालन अनुकूलन के अंतर्गत उन्होंने बताया कि एआई आधारित टूल्स सप्लाई चेन प्रबंधन, इन्वेंट्री नियंत्रण और मेंटेनेंस की भविष्यवाणी में उपयोगी साबित हो रहे हैं, जिससे लागत में कमी और दक्षता में वृद्धि होती है।
निर्णय समर्थन हेतु प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एआई प्रबंधकों को बाजार प्रवृत्तियों और सम्भावित जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम बनाता है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी होती है। टैलेंट मैनेजमेंट के संदर्भ में उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया, प्रोफाइल स्क्रीनिंग और कर्मचारी प्रदर्शन विश्लेषण में भी एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, जिससे मानव संसाधन प्रबंधन अधिक प्रभावशाली बन रहा है।
पारुल गौतम ने एआई लागू करने के व्यावहारिक फ्रेमवर्क पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसी भी संस्था को एआई अपनाने से पहले अपनी डेटा संरचना, कौशल स्तर और संगठनात्मक संस्कृति का मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने छोटे स्तर के प्रयोगों से शुरुआत कर धीरे-धीरे बड़े स्तर पर एकीकरण करने की रणनीति पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने एथिकल एआई गवर्नेंस, डेटा गोपनीयता और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दीर्घकालिक सफलता के लिए भरोसा और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग आवश्यक है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने अतिथि वक्ता से एआई आधारित प्रबंधन, भविष्य की नौकरियों और डिजिटल नेतृत्व से संबंधित प्रश्न पूछे।
एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन ने कहा कि ऐसे अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से परिचित कराते हैं और उन्हें अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक दृष्टिकोण से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि एआई जैसे समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद छात्र-छात्राओं के आत्मविश्वास और पेशेवर दृष्टिकोण को मजबूत बनाता है।
अंत में संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने अतिथि वक्ता का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्र-छात्राओं को तकनीकी परिवर्तनों के साथ कदम मिलाने और भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरक अनुभव साबित हुआ, जिसने उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रबंधन, रणनीतिक सोच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक कौशलों की दिशा में नई प्रेरणा प्रदान की।
चित्र कैप्शनः अतिथि वक्ता पारुल गौतम और एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के साथ छात्र-छात्राएं।
