डिस्कस थ्रोअर बनवीर पर सात साल का प्रतिबंध

लम्बी दूरी के धावक हरेंद्र कुमार फिर निलम्बित

डोपिंग के खिलाफ राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी का बड़ा एक्शन

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। भारतीय एथलेटिक्स में डोपिंग के मामलों पर सख्ती जारी है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) की अपील पैनल (एडीएपी) ने डिस्कस थ्रोअर (चक्काफेंक एथलीट) बनवीर सिंह पर सात साल का प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पहले नाडा की एंटी-डोपिंग डिसिप्लिनरी पैनल (एडीडीपी) ने उन्हें पांच साल के लिए निलम्बित किया था।

37 वर्षीय बनवीर सिंह डोप टेस्ट में प्रतिबंधित स्टेरॉयड मेथैंडीनोन के सेवन के दोषी पाए गए थे। एडीडीपी ने दिसम्बर 2024 में उन पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया था, जो 23 दिसम्बर 2024 से प्रभावी था। हालांकि, बाद में मामले की समीक्षा करते हुए एडीएपी ने उनकी सजा बढ़ाकर सात साल कर दी। नाडा ने फिलहाल सजा बढ़ाने के पीछे की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की है।

बनवीर सिंह पहले ही 'वेयरअबाउट्स फेल्योर' के मामले में दो साल की अयोग्यता झेल रहे थे। 12 महीनों के भीतर तीन बार अपनी लोकेशन संबंधी जानकारी सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराने के कारण उन पर यह कार्रवाई हुई थी। यह प्रतिबंध 22 दिसम्बर 2025 तक लागू है। बनवीर सिंह का एथलेटिक्स करियर ज्यादा सफल नहीं रहा। साल 2022 में भुवनेश्वर में आयोजित इंडियन ग्रांप्री में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया था, जो उनके करियर का सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन माना जाता है। इसके अलावा वह कभी शीर्ष तीन में जगह नहीं बना सके।

इसी बीच लम्बी दूरी के धावक हरेंद्र कुमार को भी नाडा ने चार साल के लिए फिर से निलम्बित कर दिया है। उनका नया प्रतिबंध 2 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। हरेंद्र इससे पहले भी डोपिंग के मामले में दोषी पाए जा चुके हैं। वर्ष 2022 में प्रतिबंधित पदार्थ डार्बेपोएटिन (डीईपीओ) के सेवन के कारण उन्हें चार साल का बैन मिला था, जो 3 अगस्त 2022 से लागू हुआ था। हाल के वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स में डोपिंग के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। नाडा और अन्य एजेंसियां खिलाड़ियों पर निगरानी और कार्रवाई को और सख्त कर रही हैं, ताकि खेलों की निष्पक्षता बनाए रखी जा सके।

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