किसी ने नहीं की थी भारतीय दल से 13 स्वर्ण की उम्मीद

सात स्वर्ण ही सोच रखा था,  मुक्केबाजों ने बढ़ाया गौरव

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण ओलम्पिक, एशियाड या राष्ट्रमंडल खेलों से पहले जब भी पदकों का अनुमान लगाते हैं तो हकीकत में उससे कम पदक ही नसीब होते हैं। लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजों के पंचों से बरसे सोने ने सारे अनुमानों को धो डाला।

साई ने सात स्वर्ण समेत कुल 32 पदक जीतने का अनुमान लगाया था, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हुए 13 स्वर्ण समेत कुल 39 पदक जीतते हुए पदक तालिका में सम्मानजनक चौथा स्थान हासिल किया था। सच्चाई यह है कि भारतीय दल से इस प्रदर्शन की कल्पना किसी ने नहीं की थी, क्योंकि उसकी ताकत वाले खेल इन खेलों से हटा दिए गए थे।

मुक्केबाजों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण समेत कुल 10 पदक जीते, जबकि साई की ओर से तीन स्वर्ण समेत कुल सात पदक का अनुमान लगाया गया था। पैरा एथलेटिक्स में दो और जूडो में एक स्वर्ण का अनुमान लगाया था, लेकिन यहां कुल पांच स्वर्ण जीते गए।

हर्ष, अस्मिता से नहीं थी पदक की उम्मीद साई ने जूडो में स्वर्ण की उम्मीद अरुण कुमार से की थी, पर वह डोप में फंसने से ग्लासगो नहीं गए। जूडो के स्वर्ण विजेता हर्ष सिंह व अस्मिता डे से उम्मीद ही नहीं की थी। बॉक्सिंग में स्वर्ण की उम्मीद प्रीति, जैस्मिन व सचिन से की थी, लेकिन साक्षी, प्रिया, अरुंधति और अंकुश ने भी स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया।

एथलेटिक्स में चार के मुकाबले जीते 10 पदक

एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा, प्रवीण चित्रवेल, सर्वेश कुसारे, प्रियंका गोस्वामी से उम्मीद थी। एथलीटों ने 5 रजत व 5 कांस्य समेत कुल 10 पदक जीते। खासतौर पर दोहरे पदक विजेता गुलवीर सिंह का प्रदर्शन यादगार रहा। शर्मिला व सोमन राणा का स्वर्ण जीतने का अनुमान भी ठीक निकला। लेकिन दिलीप गावित ने भी स्वर्ण जीता। वेटलिफ्टिंग में एक स्वर्ण समेत 9 पदक का अनुमान खरा निकला। मीराबाई चानू के स्वर्ण समेत वेटलिफ्टरों ने 8 पदक (1)  स्वर्ण, 6 रजत, 1 कांस्य) जीते।

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