चार साल में बेईमान एथलीटों का आंकड़ा तीन सौ पार

एथलीट्स लगातार डोपिंग में फंस रहे, करतूत रहे स्वीकार

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। खेलों में शक्तिवर्धक दवाओं का प्रयोग तो आम है, पर इनके सेवन की स्वीकारोक्ति से खिलाड़ी इन्कार करते रहे हैं, लेकिन बीते चार वर्षों में तीन सौ से अधिक खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के समक्ष फंसने के बाद डोपिंग करने की बात स्वीकार की है। इनमें कई नामी खिलाड़ी भी शामिल हैं।

2023 में राष्ट्रमंडल वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का स्वर्ण जीतने वाली और बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पॉपी हजारिका भी डोपिंग करने की बात स्वीकार चुकी हैं। हाल ही में राष्ट्रमंडल टीम से बाहर किए गए तीन भारोत्तोलकों ने भी डोपिंग की बात स्वीकारी है। यह सम्भव हुआ है, 2021 में लाए गए वाडा के नए नियम के तहत। अगर डोप पॉजिटिव खिलाड़ी यह स्वीकार कर लेता है कि उसने डोपिंग की है तो उसे कुल प्रतिबंध में से एक साल की छूट दी जाती है। इनमें से अधिकतर पर चार के बजाय तीन साल का प्रतिबंध लगा है।

भारत में लगभग 50 नाबालिग खिलाड़ी भी डोपिंग की बात स्वीकार कर चुके हैं। डोपिंग करने वाले सबसे ज्यादा खिलाड़ी एथलेटिक्स से हैं। दूसरा स्थान वेटलिफ्टरों का है, जिनमें से 60 से अधिक खिलाडि़यों ने डोपिंग करना स्वीकार किया है। इनमें से तीन खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन पर पांच वर्ष का प्रतिबंध लगा है। इन्होंने एक नहीं बल्कि कई शक्तिवर्धक दवाओं का उपयोग किया था। तीन खिलाडि़यों ने एक से अधिक दवाओं के सेवन की बात स्वीकारी। साल 2025 में 30 अप्रैल तक 29 खिलाड़ियों ने डोपिंग करने की बात स्वीकारी थी, इनमें एक नाबालिग वेटलिफ्टर भी शामिल था।  जिन तीन खिलाडि़यों ने एक से अधिक  दवाओं के सेवन स्वीकार किया है, वे भी बीते वर्ष के हैं।

 

 

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