पोलैंड की जैवलिन थ्रोअर मारिया एक सच्ची चैम्पियन खिलाड़ी

आठ माह के बच्चे की जान बचाने अपना ओलम्पिक मेडल नीलाम किया

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। पोलैंड की प्रसिद्ध जैवलिन थ्रोअर मारिया आंद्रेजकज़िक एक खिलाड़ी से कहीं अधिक अपनी इंसानियत के लिए पहचान बना चुकी हैं। टोक्यो ओलम्पिक की रजत पदक विजेता मारिया, खेल के मैदान से परे मानवता की एक महान मिसाल पेश करती है। खुद गंभीर बीमारी (बोन कैंसर) को मात देने वाली मारिया ने एक 8 महीने के बच्चे की जान बचाने के लिए अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि यानी अपना ओलम्पिक मेडल नीलाम कर दिया था।

मारिया ने रियो 2016 ओलम्पिक में मामूली अंतर से पदक गंवाया था। इसके बाद उन्हें कंधे की गंभीर चोट और 2018 में बोन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का सामना करना पड़ा। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, कैंसर और दर्द को हराकर मैदान पर शानदार वापसी की।

टोक्यो ओलम्पिक में रजत पदक जीतने के तुरंत बाद उन्होंने एक 8 महीने के बीमार बच्चे (मिलोस्ज़ेक) के बारे में पढ़ा, जिसे दिल की सर्जरी के लिए अमेरिका जाने की जरूरत थी। मारिया ने कहा कि वह जानती हैं कि जिंदगी के लिए संघर्ष करना क्या होता है, इसलिए उनके लिए यह मेडल "सिर्फ एक वस्तु" था, जबकि एक बच्चे की जान अनमोल थी।

उन्होंने अपना एकमात्र ओलम्पिक मेडल 1,25,000 डॉलर में नीलाम कर दिया। पोलैंड की एक सुपर मार्केट चेन (जाबका)  ने इस नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाकर मेडल खरीदा और पूरी रकम बच्चे के इलाज के लिए दान कर दी। कम्पनी ने मारिया के इस महान और त्यागी कदम से प्रभावित होकर उनका रजत पदक सम्मान स्वरूप उन्हें वापस लौटा दिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि एक सच्चा चैम्पियन केवल अपनी जीती हुई ट्रॉफियों से नहीं, बल्कि अपने विशाल और दयालु दिल से पहचाना जाता है।

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