मां शारदे की पूजा-अर्चना कर मांगा विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद
पराक्रम दिवस के रूप में मनाई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती
मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को शिक्षकों, छात्र-छात्राओं ने श्रद्धाभाव से मां शारदे की पूजा-अर्चना कर विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद मांगा। वसंत पंचमी पर विद्या की आराध्य देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना आचार्य करपात्री महाराज और आचार्य विकास मिश्रा ने मंत्रोच्चार के बीच कराई। इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई गई।
के.डी. मेडिकल कॉलेज में आचार्य करपात्री महाराज तथा आचार्य विकास मिश्रा ने मंत्रोच्चार के बीच मां सरस्वती की पूजा-अर्चना सम्पन्न कराई। पूजा-अर्चना केडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, कुलसचिव डॉ. विकास कुमार अग्रवाल, एचआर मैनेजर मनोज गोस्वामी आदि ने छात्र-छात्राओं के साथ की। इस अवसर पर कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने छात्र-छात्राओं से कहा कि हम सरस्वती की स्तुति करके अपने जीवन में सकारात्मकता का संचार कर सकते हैं। हम जीवन भर कुछ न कुछ सीखकर ज्ञान अर्जित करते रहते हैं इसलिए वसंत पंचमी का महत्व केवल छात्र-छात्राओं के लिए ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति के लिए है।
कुलपति डॉ. लाहौरी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर 129वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सुभाष चंद्र बोस के कृतित्व और व्यक्तित्व की जानकारी दी और कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता के आह्वान ने लाखों भारतीयों में साहस, आत्मविश्वास, एकता और राष्ट्रवाद की भावना को जगाया था।
आर. के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा के.डी. मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं को वसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए लगन और मेहनत से विद्यार्जन करने का आह्वान किया। अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि मां सरस्वती की पूजा मात्र से विद्या की प्राप्ति नहीं की जा सकती इसके लिए छात्र-छात्राओं को कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यदि आपका मन शांत और पवित्र नहीं होगा तो मां सरस्वती की कृपा प्राप्त नहीं होगी, न ही पढ़ाई में सफलता मिलेगी।
चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि वसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का सूचक है। वसंत का सीधा सा अर्थ है सौन्दर्य, शब्द का सौन्दर्य, वाणी का सौंदर्य, प्रकृति का सौंदर्य तथा प्रवृत्ति का सौंदर्य। श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को हंस के समान विवेकशील होना चाहिए, जिसमें विवेक होगा वही अच्छा-बुरा समझ सकता है।
