एमपी की महिला पहलवान को प्रतियोगिता में खेलने से रोका

दो जन्म प्रमाण पत्र पेश करने पर नहीं खेल सकी राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने संभाजी नगर में राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप के पहले दिन एक अंडर-17 महिला पहलवान को प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया, क्योंकि उसके पिता ने अलग-अलग राज्यों से दो जन्म प्रमाण पत्र पेश किए थे, जिससे सरकारी स्तर पर दस्तावेज़ सत्यापन में स्पष्ट कमियां भी उजागर हुईं।

मध्य प्रदेश की तरफ से महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने की इच्छुक एक पहलवान के जन्म प्रमाण पत्रों में विसंगतियां पाई गई थीं जिसके बाद अधिकारियों ने उसे प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया। यह दस्तावेज एजेंसी के पास भी हैं जिनमें मध्य प्रदेश में जारी किए गए एक जन्म प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 26 अगस्त, 2010 बताई गई है, लेकिन पंजीकरण और जारी करने की तिथि 16 नवम्बर, 2021 दिखाई गई है। यह तिथि जन्म के एक दशक से भी अधिक समय बाद की है।

डब्ल्यूएफआई के एक सूत्र के अनुसार पंजीकरण में देरी के बारे में पूछे जाने पर इस पहलवान के पिता ने राजस्थान से जारी किया गया एक और जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। नए जन्म प्रमाण पत्र में भी जन्मतिथि 26 अगस्त, 2010 ही दर्ज है लेकिन उसमें पंजीकरण की तिथि एक सितम्बर, 2010 बताई गई है। यह पंजीकरण राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था और जन्म स्थान के रूप में वहां के एक निजी नर्सिंग होम का उल्लेख किया गया है। हालांकि यह प्रमाण पत्र इसके काफी बाद अप्रैल 2025 में जारी किया गया था। पिता ने इस बात पर जोर दिया कि जन्मतिथि में कोई हेरफेर नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा कि परिवार के मध्य प्रदेश स्थानांतरित होने के बाद इस राज्य से भी नया प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया था, ताकि पहलवान राज्य का प्रतिनिधित्व कर सके। डब्ल्यूएफआई के अधिकारियों ने हालांकि पहलवान को प्रतियोगिता में प्रवेश देने से इनकार कर दिया और सवाल उठाया कि मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बिना कोई अन्य राज्य कैसे दूसरा जन्म प्रमाण पत्र जारी कर सकता है।

 

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