दिल हॉकी तो दिमाग में चढ़ा बॉक्सिंग का जुनून
तरनेश तपन के प्रयासों से बढ़ा ग्वालियर का गौरव
दिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता मुक्केबाज
खेलपथ विशेष
ग्वालियर। समय दिन-तारीख देखकर आगे नहीं बढ़ता। इंसान यदि ठान ले तो उसके लिए कुछ भी असम्भव नहीं है। तीन दशक पहले बॉक्सिंग में ग्वालियर को कोई पहचानता भी नहीं था। ऐसे नाजुक समय में ग्वालियर को एक ऐसी शख्सियत मिली जिसका दिल हॉकी तो दिमाग हमेशा ग्वालियर-चम्बल सम्भाग में बॉक्सिंग के उत्थान पर ही व्यस्त रहा। इस शख्सियत का नाम है रियल हीरो अवॉर्डी तरनेश तपन। सच कहें तो तरनेश तपन ने बालिका बॉक्सिंग को नई पहचान दी।
दर्पण खेल संस्थान के सचिव तरनेश तपन मूलतः हॉकी खिलाड़ी रहे हैं लेकिन उन्होंने ग्वालियर में न केवल बॉक्सिंग का पौधा रोपा बल्कि अपने कठिन परिश्रम से खेल के क्षेत्र में ऐसी नजीर पेश की कि लम्बे समय से हर जुबां पर तरनेश तपन के चेले हैं, मार-मार कर खेले हैं, की अनुगूंज सुनाई दे रही है। रियल हीरो अवॉर्डी तरनेश तपन ने बरसों पहले ग्वालियर बॉक्सिंग एसोसिएशन का गठन करके बॉक्सिंग गतिविधियों का ग्वालियर में शुभारम्भ किया लेकिन चूंकि वह शुरू से ही हॉकी खिलाड़ी थे लिहाजा बॉक्सिंग के उत्थान के लिए उन्हें इस खेल का ककहरा सीखना पड़ा।
कहते हैं कि सफलता के लिए पागलपन जरूरी है। रियल हीरो अवॉर्डी तरनेश तपन ने बिना बॉक्सिंग खेल सामग्री तथा किसी की मदद लिए बिना न केवल इस खेल का बिगुल बजाया बल्कि अपने जोश-जुनून और मेहनत के बल पर इस खेल को नई पहचान दी। तरनेश तपन बताते हैं कि ग्वालियर की पहली राष्ट्रीय महिला बॉक्सर बनने का श्रेय मनीषा शुक्ला उपमन्यु को जाता है। चेन्नई में आयोजित प्रथम महिला फेडरेशन बॉक्सिंग टूर्नामेंट में ग्वालियर की मनीषा शुक्ला ने सिल्वर मेडल जीतकर ग्वालियर की मेडल जीतने की परम्परा का जो शुभारम्भ किया उसके बाद प्रियंका खरे ने सिक्किम में हुई जूनियर बॉक्सिंग प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर सफलता की नई इबारत लिखी।
इन दो बेटियों की सफलता के बाद बॉक्सिंग में ग्वालियर की सफलताओं का सिलसिला न केवल चल पड़ा बल्कि हॉकी का हमलावर तरनेश तपन प्रदेश एवं देश में बॉक्सिंग कोच के रूप में जाना-पहचाना जाने लगा। तरनेश तपन एक अच्छे कोच ही नहीं बल्कि नेकदिल इंसान भी हैं। तपन जी की नेकदिली और आर्थिक मदद के चलते ग्वालियर के कई आर्थिक रूप से कमजोर बॉक्सरों को नई ऊर्जा मिली। तरनेश तपन ने अनुसूचित जाति के बालक-बालिकाओं को बॉक्सिंग में पारंगत करने का न केवल निश्चय किया बल्कि उनकी शुचिता और समर्पण के चलते प्रतिवर्ष ग्वालियर के बालक-बालिकाएं स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक जीतकर देश में प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं।
ग्वालियर बॉक्सिंग के महत्वपूर्ण तथ्य
1. बॉक्सिंग में मध्य प्रदेश का शीर्ष एकलव्य अवॉर्ड ग्वालियर की चार बेटियां प्रीति सोनी 2010, प्रियंका सोनी 2011, निशा जाटव 2012 तथा अंजली शर्मा 2014 में जीत चुकी हैं।
2. अंजली शर्मा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्वालियर-चम्बल सम्भाग की पहली मेडलिस्ट हैं।
3. ग्वालियर बॉक्सिंग एसोसिएशन के सचिव तरनेश तपन को बॉक्सिंग में जमीनी कार्य करने के लिए वर्ष 2010 में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा रुपये पांच लाख का नगद पुरस्कार तथा रियल हीरो अवॉर्ड से मुंबई में नवाजा गया। तपन जी को यह अवॉर्ड मुकेश अम्बानी परिवार की मौजूदगी में भारतरत्न सचिन तेंदुलकर द्वारा प्रदान किया गया।
4. तरनेश तपन ने अनेक बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मध्य प्रदेश बॉक्सिंग टीम के कोच, मैनेजर तथा रिंग ऑफिशियल के रूप में अपना दायित्व निभाया।
5. ग्वालियर की होनहार खिलाड़ी प्रीति सोनी ने यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग टूर्नामेंट में जीवाजी यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करते हुए जालंधर में गोल्ड मेडल जीता।
6. ग्वालियर बॉक्सिंग एसोसिएशन तथा दर्पण खेल संस्थान द्वारा अनेक बालक-बालिका बॉक्सरों को बॉक्सिंग का ककहरा सिखाया।
7. ग्वालियर के बॉक्सरों ने राज्य, राष्ट्रीय, स्कूल एवं यूनिवर्सिटी स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखी है।
8. बॉक्सिंग कोच तरनेश तपन के विशेष आग्रह पर तत्कालीन खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा ग्वालियर में पहला एवं प्रदेश का एकमात्र बॉक्सिंग फीडर सेंटर स्थापित किया गया।
9. कोच तरनेश तपन के प्रयासों से नगर निगम द्वारा खेल परिसर में बॉक्सिंग रिंग स्थापित करके नियमित बॉक्सिंग कोचिंग सेंटर स्थापित किया गया।
