गुजरात में 18 साल से नहीं हुई व्यायाम शिक्षकों की भर्ती

खेल बजट आवंटन में मोदी सरकार कर रही राज्यों से भेदभाव

खेलपथ संवाद

ग्वालियर। देश को खेलों की महाशक्ति बनाने का सब्जबाग दिखाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के गृह राज्य गुजरात में 18 साल से व्यायाम शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। 23 साल बाद खेल सहायक परीक्षा आयोजित की गई। इस देरी के चलते लाखों योग्य उम्मीदवार परीक्षा नहीं दे पाए।

गुजरात में 18 साल तक व्यायाम शिक्षकों की भर्ती नहीं होने के कारण, लाखों युवाओं का शारीरिक शिक्षक बनने का सपना चूर-चूर हो गया। गुजरात सरकार चाहती तो नियमों में शिथिलता देकर शारीरिक शिक्षक बनने का सपना संजोए लाखों उम्मीदवारों का भला कर सकती थी। मेरा मानना है कि गुजराती धंधेबाज हो सकता है लेकिन खेलों का उद्धारक कतई नहीं।

आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो 75 फीसदी खेल बजट गुजरात में खर्च हो रहा है लेकिन पदक दिलाने में हरियाणा सिरमौर है। एक सच्चा खेलप्रेमी कभी भेदभाव नहीं करता, जैसा मोदी सरकार कर रही है। हरियाणा के खिलाड़ी देश के लिए लगातार मेडल ला रहे हैं, बेहतर होता खेल बजट और सुविधाओं में हरियाणा के खिलाड़ियों को उपलब्धियों के हिसाब से प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सबसे अधिक मेडल दिलाने वाले राज्य हरियाणा को सिर्फ रुपये 66.88 करोड़ और पिद्दी गुजरात को रुपये 426 से 608 करोड़ रुपये आवंटित करना ही क्या सच्चा खेलप्रेम है।

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